Description
भगवान् बुद्ध को एशिया की ज्योति कहा जाता है जिनका जीवन मानवता की व्याख्या है। उन्हीं धर्मचक्रप्रवर्तक भगवान् बुद्ध के जीवन एवं दर्शन को संस्कृत में लेखनीबद्ध करने का अनुशंसनीय कार्य सुधी लेखक संस्कृत के विख्यात विद्वान् डॉ० हरिप्रकाश शर्मा ने, जो कि इन्दिरा गान्धी नेशनल कालेज लाडवा (कुरुक्षेत्र) के प्राचार्य रहे हैं, अपनी इस प्रस्तुत पुस्तक में किया है, उनकी यह कृति मूल हिन्दी पुस्तक का देववाणी संस्कृत में अनूदित रूप है जिसमें भाषा की उत्कृष्टता स्पष्ट प्रकट हो रही है। सुधी लेखक अपने सारे शैक्षणिक काल में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग तथा प्राच्य विद्या संस्थान की प्रत्येक विचार गोष्ठी तथा अन्य शैक्षणिक गतिविधयों में अनिवार्य रूप से भागीदार रहे हैं और उनमें सक्रिय योगदान दिया है। इसलिए भाषा पर उनका बहुत गहरा अधिकार है जिसका परिचय उनकी इस कृति से प्राप्त हो जता है। बौद्ध साहित्य पालि तथा संस्कृत दोनों भाषाओं में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। लेखक महोदय ने बौद्ध दर्शन की मूल शब्दावली को बिना किसी विकृति के बनाए रखने का बड़ा सराहनीय प्रयास किया है परन्तु मूल पारिभाषिक शब्दों के कारण कोई दुर्बोधता न आ जाए इसलिए भाषा को बड़ा सुगम रखा है। कोई भी पाठक इनको पढते समय कहीं भी किसी प्रकार का व्यवधान अनुभव नहीं करेगा। वर्णनशैली भी बड़ी प्रवाहपूर्ण तथा रोचक है, सुधी लेखक के भाषा कौशल तथा विषय में निपुणता का प्रमाण है।





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